पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति
व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचिय
कक्षा 12 के लिए अर्थशास्त्र की पाठ्यपुस्तक


राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING
प्रथम संस्करण
अप्रैल 2007 चैत्र 1929
पुनर्मुद्रण
अक्तूबर 2007, फ़रवरी 2009,
जनवरी 2010, जनवरी 2011,
दिसंबर 2012, फ़रवरी 2014,
दिसंबर 2015, फ़रवरी 2017,
फ़रवरी 2018, दिसंबर 2018,
जनवरी 2019, नवंबर 2019,
अगस्त 2021, और नवंबर 2021
संशोधित संस्करण
अक्तूबर 2022 कार्तिक 1944
पुनर्मुद्रण
मार्च 2024 चैत्र 1946
जून 2024 ज्येष्ठ 1946
जनवरी 2025 माघ 1946
अप्रैल 2025 चौत्र 1947
मई 2026 वैशाख 1947
PD 15T BS
© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2007, 2022
₹ 70.00
एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।
प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली 110 016 द्वारा प्रकाशित तथा पर्ले प्रिटर्स, सी-105, ओखला फेज-1, नई दिल्ली - 110020 द्वारा मुद्रित।
सर्वाधिकार सुरक्षित
एन.सी.ई.आर.टी. के प्रकाशन प्रभाग के कार्यालय
एन.सी.ई.आर.टी. कैंपस
श्री अरविंद मार्ग
नयी दिल्ली 110 016 फोन : 011-26562708
108, 100 फीट रोड
हेली एक्सटेंशन, होस्डेकरे
बनाशंकरी III स्टेज
बेंगलुरु 560 085 फोन : 080-26725740
नवजीवन ट्रस्ट भवन
डाकघर नवजीवन
अहमदाबाद 380 014 फोन : 079-27541446
सी.डब्ल्यू.सी. कैंपस
निकटः धनकल बस स्टॉप पनिहटी
कोलकाता 700 114 फोन : 033-25530454
सी.डब्ल्यू.सी. कॉम्प्लैक्स
मालीगांव
गुवाहाटी 781021 फोन : 0361-2674869
प्रकाशन सहयोग
अध्यक्ष, प्रकाशन प्रभाग : एम.वी. श्रीनिवासन
मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार
मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार
मुख्य उत्पादन अधिकारी : दीपक जैसवाल
(प्रभारी)
सहायक संपादक : गोबिंद राम
उत्पादन सहायक : मनोज कुमार
आवरण, सज्जा एवं चित्रांकन
निधि वधवा
काटोंग्राफ़ी
इरफ़ान
आमुख
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। यह सिद्धांत किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाववश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाए हुए है। नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास है इस प्रयास में हर विषय को एक मजबूत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में काफ्री दूर तक ले जाएँगे।
इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभवों पर विचार करने का कितना अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चे बड़ों द्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नए ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों एवं स्तोतों की अनदेखी किए जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिए ज्ञरूरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धारित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।
ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिंदगी और कार्यशैली में काफ्री फेरबदल की माँंग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरुरी है जितना वार्षिक कैलेंडर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिए नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक दबाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव उत्पन्न करने में कितनी प्रभावी सिद्ध होती है। बोझ की समस्था से निपटने के लिए पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुनरिंर्धारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान एवं अध्यापन के लिए उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और सार्थक बनाने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत एवं बहस और हाथ से की जाने बाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।
एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिए बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्ञता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समूह के अध्यक्ष हरि वासुदेवन, प्रोफेसर और अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समिति के मुख्य सलाहकार तापस मजूमदार, प्रोफेसर की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान दिया; इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचार्यों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ञ हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री तथा सहयोगियों की मद्द लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मृणाल मीरी, प्रोफेसर एवं जी. पी. देशपांडे, प्रोफेसर की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनीटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरंतर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों एवं सुझावों का स्वागत करेगी, जिनसे भावी संशोधनों में मद्द ली जा सके।
नयी दिल्ली
20 नवंबर 2006
निदेशक
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य साम्रगी का पुनर्स्थोजन
कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्स्योजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. द्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।
पाठ्य सामग्रियों के पुनर्सयोजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -
वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है।
भारत का संविधान
उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में
व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता
और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता
बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति
हरि वासुदेवन, प्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता
मुख्य सलाहकार
तापस मजूमदार, एमेरिटस प्रोफेसर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
सलाहकार
सतीश जैन, प्रोक्फे सर, आर्थिक नियोजन तथा अध्ययन संस्थान, सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
सदस्य
हरीश धवन, लेक्चरर, रामलाल आनंद कॉलेज (सांध्य), नयी दिल्ली
पापिया घोष, शोध छात्रा, दिल्ली स्कूल ऑफ इँकोनोमिक्स, नयी दिल्ली
राजेंद्र प्रसाद कुंडु, लेक्चरर, अर्थशास्त्र विभाग, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता
सुगातो दास गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, सी.ई.एस.पी., जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नयी दिल्ली
तापसिक बनर्जी, शोध छात्र, आर्थिक नियोजन एवं अध्ययन संस्थान, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
सदस्य समन्वयक
जया सिंह, लेक्चरर, अर्थशास्त्र, डी.ई.एस.एस.एच., एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली
आभार
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देने के लिए शिक्षाविदों तथा विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करती है। हम जलजीत सिंह, रीडर, अर्थशास्त्र विभाग , मणिपुर विश्वविद्यालय को उनके योगदान के लिए धन्यवाद देते हैं। हम अपने सहकर्मियों- नीरजा रश्म, रीडर, पाठ्यचर्या समूह; एम.बी. श्रीनिवासन, असीता रविंद्रन, प्रतिमा कुमारी, लेक्चर, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग का उनके द्वारा प्रदत्त सामग्री तथा सुङ्ञाव के लिए उन्हें भी धन्यवाद जापित करते हैं।
हम स्व. दीपक बैनर्जी, प्रोफ्रेसर (सेवानिवृत) प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता को उनके बेशकीमती सुझावों के लिए सदैव स्मरण रखेंगे। अगर उनका स्वास्थ्य साथ देता, तो हम उनके अनुभवों से और भी लाभान्वित होते।
विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने हर प्रकार से सहयोग प्रदान किया। परिषद् ए.के. सिंह, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), वाराणसी, उत्तर प्रदेश; ऑबिका गुलाटी, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, संस्कृत विद्यालय; बी.सी. ठाकुर, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय, सूरजमल विहार; रीतू गुप्ता, प्राचार्य, स्नेह इंटरनेशनल स्कूल; शोभना नायर, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), मदर इंटरनेशनल स्कूल; रश्मि शर्मा, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), केंद्रीय विद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कैपस के प्रति आभार व्यक्त करती है।
हम इनके प्रति भी आभारी हैं: शालिनी सिंह शोध छात्रा, जे.एन.यू., डी.डी. नौटियाल, पूर्व सचिव एवं भाषाविद, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग; रामतप पांडेय, पूर्व सहायक निदेशक, वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली आयोग; ओ.पी. अग्रवाल, प्रोफेसर (अवकाशप्राप्त), मेरठ विश्वविद्यालय; एच.के. गुप्ता, बाबूराम सर्वोद्य बाल विद्यालय, शाहदरा, दिल्ली; रमेश चंद्रा, रीडर (सेवानिवृत्त), एन. सी.ई.आर.टी., प्रमोद कुमार झा, अनुवादक।
पुस्तक के विकास में सहयोग के लिए हम सविता सिन्हा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग, एन.सी.ई.आर.टी. के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें हर संभव सहयोग दिया।
पुस्तक के विकास के विभिन्न चरणों में सहयोग के लिए प्रभारी कंप्यूटर कक्ष, दिनेश कुमार; कॉपी एडिटर, विनय शंकर पांडेय एवं सतीश झा तथा प्रूफ रीडर, शहजाद हुसैन एवं बबीता झा , के भी हम आभारी हैं। प्रकाशन विभाग द्वारा हमें पूर्ण सहयोग एवं सुविधाएँ प्राप्त हुई, इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं।
इस पाठपुस्तक की समीक्षा ओ.पी. अग्रवाल, प्रोफेसर (सेवानिवृत्त); हरीश धवन, एसोसिएट प्रो.फेसर, मिरांडा हाउस; शालिनी सक्सेना, एसोसिएट प्रोफेसर, डी.सी.ए.सी. एवं भारत गर्ग, सहायक प्रो.फेसर, श्याम लाल कॉलेज, विशेषज्ञों द्वारा की गई है। इनके योगदान को विधिवत स्वीकार किया गया।
परिषद् इस संस्करण के पुनर्सयोजन के लिए पाठ्यक्रमों, पाठ्यपुस्तकों, विषय सामग्री के विश्लेषण हेहु दिए गए महत्वपूर्ण सहयोग के लिए नीरजा रश्म, प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली; एम.वी. श्रीनिवासन, प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली; जया सिंह, प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली; प्रतीमा कुमारी, एस्पोसिएट प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली; असीता रविंद्रन, एस्पोसिएट प्रोफेसर, पी.एस.डी., एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली; सबीता पटनायक, पी.जी.टी. अर्थशास्त्र, डी.एम.एस., आर.आई.ई., भुवनेश्वर; अनीता रविंद्रन, पी.जी.टी., अर्थशास्त्र, डी.एम.एस., आर.आई.ई., मैसूरू के प्रति आभार व्यक्त करती है।
परिषद तम्पाकम्यूम अलन मुस्तफा, जे.पी.एफ.; अयाज्ञ अहमद अंसारी, मुकद्दस आजम, अमजद हुसैन, और फरहीन फातिमा, डी.टी.पी. ऑपरेटर का भी आभार व्यक्त करती है, जिन्होने इस पुस्तक को आकार देने में योगदान दिया है।
विषय-सूची
आमुख ....iii
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन .....v
1. परिचय
2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
2.3 उपभोक्ता का इष्टतम चयन.... 20
2.4 माँग 22
2.5 बाज्ञार मांग 29
2.6 माँग की लोच....30
3. उत्पादन तथा लागत
4. पूर्ण प्रतिस्पर्थां की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
4.4 एक फर्म का पूर्ति वक्र 68
4.5 फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारक तत्व.... 72
5. बाज्ञार संतुलन
5.1 संतुलन, अधिमाँग, अधिपूर्ति.... 81
5.2 अनुप्रयोग 94
