नागरिकों और विदेशी नागरिकों के लिए रंग-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस
Eduteria Insights · 24 Oct 2026
चर्चा में क्यों?
सरकार नागरिकों और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस को अलग-अलग रंगों में जारी करने की योजना पर विचार कर रही है।
इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने मोटर वाहन नियमों में संशोधन का मसौदा तैयार किया है। ये बदलाव केवल रंग बदलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, सड़क सुरक्षा और दस्तावेजों के सत्यापन से भी जुड़े हैं।
लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा जारी या renew किया गया प्रत्येक ड्राइविंग लाइसेंस फॉर्म 7 में लैमिनेटेड या पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) कार्ड के रूप में होगा
उद्देश्य
ड्राइविंग लाइसेंस को आसानी से पहचानने योग्य बनाना, ताकि लाइसेंसधारक की श्रेणी की पहचान करने में मदद मिल सके।
2. भारतीय और विदेशी लाइसेंसधारकों की आसानी से पहचान करना।
3. लाइसेंस पर नागरिकता संबंधी जानकारी दर्ज करना।
4. लाइसेंस की जाँच और सत्यापन को आसान बनाना।
प्रस्ताव के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस पर निम्नलिखित जानकारियाँ दर्ज करना अनिवार्य किया जा सकता है:
रक्त समूह (Blood Group)।
मोबाइल नंबर।
आपातकालीन संपर्क नंबर (Emergency Contact Number)।
नागरिकता संबंधी जानकारी।
उम्र और पते के प्रमाण के नियमों में बदलाव
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक को अपनी पहचान, उम्र और पते से संबंधित दस्तावेज देने पड़ते हैं।
सरकार ने दस्तावेजों के सत्यापन को मजबूत बनाने के लिए कुछ बदलाव प्रस्तावित किए हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
पहचान, उम्र और पते के प्रमाण के लिए स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में बदलाव।
कार्यपालक मजिस्ट्रेट या नोटरी के समक्ष शपथ लेकर बनाए गए हलफनामों को उम्र और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने का प्रस्ताव।
जीवन बीमा पॉलिसी को उम्र और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की व्यवस्था में बदलाव।
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