मुरिया दरबार में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
Eduteria Insights · 23 Oct 2026
चर्चा में क्यों ?
23 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा के पारंपरिक ‘मुरिया दरबार’ में शामिल हुईं.
महत्त्वपूर्ण पक्ष:
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा का एक पारंपरिक जनसभा आयोजन है, जिसमें बस्तर क्षेत्र के जनजातीय प्रतिनिधि, पारंपरिक मुखिया, ग्रामीण समुदायों के प्रतिनिधि और प्रशासन से जुड़े लोग शामिल होते हैं। इसकी पहली दर्ज शुरुआत 1876 में मानी जाती है।
ऐतिहासिक रूप से, इस सभा में स्थानीय समुदाय अपनी समस्याएँ, शिकायतें और माँगें तत्कालीन बस्तर शासक के सामने रखते थे। वर्तमान समय में प्रशासनिक अधिकारी समुदायों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की दिशा में कार्य करने की भूमिका निभाते हैं।
इस आयोजन में पारंपरिक पदाधिकारी, जैसे मांझी और मुखिया, समुदायों की समस्याओं और सामाजिक मामलों को सामने रखने में भूमिका निभाते हैं। समय के साथ शासन-व्यवस्था में बदलाव आया है, लेकिन पारंपरिक नेतृत्व की सांस्कृतिक भूमिका बनी हुई है।
मुरिया के बारे में
मुरिया छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में रहने वाला एक प्रमुख आदिवासी समुदाय है। इसे गोंड समुदाय की एक प्रमुख उपशाखा के रूप में भी वर्णित किया जाता है। ‘मुरिया’ शब्द की उत्पत्ति के बारे में एक मत यह है कि हल्बी भाषा में ‘मुर’ का संबंध मूल या प्रारंभ से है। हालाँकि, इस शब्द की व्युत्पत्ति के बारे में अलग-अलग मत मिलते हैं।
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